RARE AND MIRACULOUS MEDICINAL PLANT DISCOVERED BY PATANJALI YOGPEETH







Haridwar, 12 Oct. : The expert team working on medicinal plants and herbs from Patanjali Yogpeeth, under the able guidance of renowned Ayurvedacharya respected Acharya Balkrishan ji  discovered a rare divya medicinal plant in the vicinity of Uttrakhand, in dense Himalayan forest region of Garhwal. Acharya shri was in search of this rare medicinal plant since years and is very much satisfied with this discovery. In Ayurveda Shastra there is an elaborate description of various miraculous medicinal plants. 'Teliya Kand' (Sauromatum venosum) is among these miraculous plant which has been described in ancient Ayurvedic text and is discovered by only a few fortunate-people.

The discovery of this rare herb will be a milestone in the field of Ayurveda and an epic work undertaken by Patanjali Yogpeeth and its Research and Development Department for the compilation of Vishwa Bhesaj Samhita (World Herbal Encyclopaedia). Patanjali Yogpeeth has also discovered several medicinal plants including-Ashtavarga, Sanjivani etc in the past.

Ancient ayurvedic text, 'Raj Nighantu' quotes about this Teliya kand- "Taila kandh deha Siddihim Vidyatte" which means one can get perfection in the health. It is having strong aphrodisiac property. It is very much effective even in diseases like Cancer. Ancient Saints and Ayurveda experts think that it is having the property of binding mercury and can also convert Copper into Gold. Above described properties show that it is a divya and miraculous medicinal plant. Such rare medicinal plants require more exploration and scientific research. The team along with Acharya ji included Dr. Anupam Srivastava, Dr. Rajesh Mishra and others.






33 comments:

Dr. chandan baman said...

patanjali works on ayurveda is very good,now ayurveda is in strog hand,i have large quentity of this kanda but i not know this is teliya kand

Richy said...

Hello Sir, Teliya kand is found in uttrakhand... where are you from? Is teliya kand available in large quantity in your city?

Richy said...

If teliya kand is found in large quantity in your city then you should contact patanjali so that they can get this plant in good amount and start research...

dr chandan baman said...

We can coolect it in moonsoon only

Richy said...

ok sir, that's good information.. From which state do you belong?

dr.chandan said...

kerla

Richy said...

Ok sir, thanx.

Ramniwas Mahala said...
This comment has been removed by the author.
vicky said...

this is good one.
this one more article gives more details about teliya kand.

http://teliyakand2.blogspot.in/

kirat said...

page (1)
The secret of telia kand
एक दिव्य औषधी तेलिया कंद zalakiratsinh@hotmail.com
Mo.9924344121
सृष्टिकर्त्ता ने प्रकृति रूपी प्रयोगशाला में औषधी रूपी रसायनों की उपस्थिति का अद्भुत सर्जन किया है । सुष्टा की इस रचना की एक प्रतिकृति अर्थात तेलिया कन्द, एक विलुप्त प्रायः वनस्पति यानि तेलिया कंन्द । सर्व प्रथम मुझे श्री नारायण दत्त श्रीमालीजी द्वारा लिखित पुस्तक में से तेलिया कन्द के विषय में विस्तृत ज्ञान प्राप्त हुआ । तत्पश्चात् मैने इस वनस्पति के विषय में अनुसन्धान कार्य प्रारम्भ किया । तेलिया कंद के विषय में अनेक भ्रामक किंवदन्तियाँ सुनने में आती है । किसी का मत है कि, तेलिया कन्द दुर्गम पहाड़ों के मध्य उत्पन्न होता है । तो कुछ लोग कहते है कि, तेलिया कन्द नाम की वनस्पति पृथ्वी से नामशेष हो गई है । इस प्रकार तेलिया कन्द क्या है, उसका वास्तविक प्राप्ति स्थान कहाँ है इस सन्दर्भ में लोग अन्धेरे में भटक रहे है । मेरे पन्द्रह वर्ष की तेलिया कन्द के विषय के अनुसन्धान के समय मुझे इस कन्द के विषय में अनेक कथन सुनने को मिले । एक महात्मा के बताने के अनुसार तेलिया कन्द लोहे को गला सकता है । एक लोहे के सरिये को लेकर जो उसे कंद के अन्दर डालकर थोड़े समय पश्चात बाहर निकालकर उसे मोड़ने पर वह आसानी से मुड़ जायेगा और कोई इसे जोगिया कन्द भी कहते है । लोग कहते है कि केन्सर के लिए यह कन्द अत्यन्त उपयोगी है । एक महात्मा के अनुसार हिमालय में साधु – महात्मा अपने शरीर की ठंड से रक्षा हेतु तेलिया कंद को चिलम में भर कर पीते है । इसके अतिरिक्त एक महात्मा ने तेलिया कन्द के द्वारा पारा एवं तांबे में से सोना (सुवर्ण) बनाया था । इसके अनेक उदाहरण हमें पढ़ने हेतु मिलते है । कई राज्यों में अनेक वनस्पतियों के मूल को लोग तेलिया कन्द नाम से जानते है । तो इस स्थिति में यहा निर्णय करना कठिन है कि वास्तविक तेलिया कंद कौन है । तो इस अनुसन्धान में यथोचित प्रयास किया है । मेरी जानकारी में इस कन्द के अनेक भाषाओं में नाम उल्लिखित है किन्तु गुरुदेव की अनुमति न होने से प्रकाशित नहीं कर सकता हूँ । प्राप्ति स्थानः- इसके प्राप्ति स्थान के विषय में किसी भी प्राचीन ग्रन्थ में उल्लेख प्राप्त नहीं होता है इसके नाम और गुणधर्मों का उल्लेख प्राप्त होता है । जैसे कि राजनिघण्टु में तेलिया कन्द का उल्लेख प्राप्त होता है- अर्शारि पत्र संकाशं तिल बिन्दु समन्वितः सस्निग्धारस्थ भूमिस्थ तिल कन्दोति विस्तृत। इसी प्रकार का उल्लेख रसेन्द्र चूड़ामणी में भी दृष्टिगत होता है-तिलकन्देति

kirat said...

page (2)
व्याख्याता तिलवत् पत्रीणी, लता क्षीरवती सुत निबंधनात्यातये खरे) । लोहद्रावीतैलकन्दं कटुष्णो वातापस्मार हारी विषारिः शोफध्नः स्याबन्धकारी रसस्य दागेवासो देहसिद्धि विद्यते । (निघण्टु भूषण) इस अतिरिक्त शब्दकल्पद्रुम के द्वितीय भाग के ८३ वें पृष्ठ पर इसका उल्लेख प्राप्त होता है । रशशास्त्र के एक ग्रन्थ सुवर्ण तंत्र (परमेश्वर परशुराम संवाद) नाम के एक ग्रन्थ में उल्लेख प्राप्त होता है कि, एक कमल कन्द जैसा कन्द होता है पानी में उत्पन्न होता है और जहाँ पर यह कन्द होता है उसमें से तेल स्रवित होकर निकटवर्ती दस फिट के घेरे में पानी के ऊपर फैला रहता है और उस कन्द के आस-पास भयंकर सर्प रहते है । इसके अतिरिक्त सामलसा गौर द्वारा लिखित जंगल की जंडी बूटी में भी पृष्ठ संख्या २२३ में भी इस कन्द का उल्लेख दृष्टिगोचर होता है। तेलिया कन्द के विषय में कहा जाता है कि यह कन्द विन्ध्याचल, आबु, गिरनार, अमरनाथ, नर्मदा नदी के किनारे, हिमालय, काश्मीर आदि स्थानों में प्राप्त होता है । मध्यभारत में छतींसगढ़, रांगाखार, भोपालपय्नम के पहाड़ों में तेलिया कन्द होतां है । उसके नाम से असके मूल बजार में बेचे जाते है । वहाँ के वृद्धों का ऐसा मत है कि जो तेलिया कन्द के रस में तांबा को गलाकर डालने पर वह(ताँबा) सोना बन जाता है । और यदि कोई व्यक्ति इस रस का सेवन करता है तो उसे बुढापा जन्दी नहीं आता है । पूज्य श्रीमालीजी ने भी इस बात का उल्लेख अपनी पुस्तक में किया है । भारतवर्ष के वे ऋषि-गण धन्य है जिन्हों ने देश को ऐसा दिव्य ज्ञान देकर देश को सोने की चिड़ियाँ की उपमा दिलाई है । वनस्पति विशेषज्ञ झाला किरत सिंह (मोरबी-पीपलीं) किसी व्यक्ति के पास इस कन्द के विषय में अधिक जानकारी और साहित्य – प्रयोग हो तो संपर्क करने की विनम्र प्रार्थना है । मो. ९८२४१६०६६९ ई-मेल- zalakiratsinh@yahoo.com
तेलीया कंद के उपयोगः- तेलीया कंद जहरी औषधि है उसका उपयोग सावधानी पुर्वक करना, संघिवा, फोडा, जख्म दाद, भयंकर, चर्मरोग, रतवा, कंठमाल, पीडा शामक गर्भनिरोधक गर्भस्थापक शुक्रोत्पादक, शुक्रस्थंभक, धनुर अपस्मार, सर्पविष, जलोदर कफ, क्षय, श्वास खासी, किसी भी प्रकार का के´शर, पेटशुल आचकी, अस्थिभंग मसा, किल, कृमी तेलीया कंद इन तमाम बीमारीयो मे रामबाण जैसा कार्य करता है, और उसका अर्क जंतुध्न केल्शीयम कि खामी, स्वाद कडवा, स्वेदध्न सोथहर और स्फुर्ति दायक हैं तेलीया कंद को कोयले मे जला के उसकी राख को द्याव, चर्मरोग, किल वगेरे बिमारीओ मे काम करता है । अन्न नली कि सुजन मे इसके बीज को निमक के साथ मिलाकर सेवन करना, इके फूल पीले सफेद ओर खुशबु दार होते है ।
सावधानीयाः- तेलीया कंद एक जहरी-औषधी है इस लीये उसका उपयोग सावधानी पूर्वक करना, तेलीया कंद के भीतर तीन प्रकार के जहरी रसायन होते है .... जो ज्यादा मात्रा मे लेने से गले मे सुजन आना, चककर, किडनी का फेल होना या ज्यादा मात्रा मे लेने से मृत्यु तक हो सकती है इसलिए इसका पुराने कंद का हि उपयोग करना यातो कंद को रातभर पानी मे भीगोने से या पानी मे नमक डाल के ऊबालने से उसका जहर निकल जाता है ।

kirat said...

page(3)

तेलीया कंद कि बुआईः- तेलीया कंद की खेती बीज से और कंद बोहने से होती है । पहले बीज को एमरी पेपर से धीस कर रातभर पानी मे भिगोये रखे उसके बाद गमले मे या गड्डे मे बोहना । जगा हंमेशा सडी हुई गीली अनुकुल आती है । उसके उपर ज्यादा द्युप नहि होनी चाहिए । यह प्लान्ट को ग्रिन हाउस ज्यादा अनुकुल आता हैं । मीटी थोडी क्षार वाली काली मीटी रेत और चुना मिला के इसके कंद का या बीज को रोपण करना ।
तेलीया कंद से काया कल्पः- गाय के दुध मे तेलीया कंद के चुर्ण को पंदरा दिन तक सेवन करने से व्यक्ति का काया कल्प हो जाता है । चूर्ण को दुध मे मिलाकर सेवन करना ।
तेलीया कंद से सुवर्ण निर्माणः- तेलीया कंद के रसको हरताल मे मिलाकर इकीस दिन तक द्युटाई करने पर हरताल निद्युम हो जाती है । वो आग मे डालने पर धुआ नहि देती । कहते है फिर वो हरताल ताम्र या चाँदि को गलाकर ऊसमे डालने पर वो सोना बन जाता है, पारें को तेलीया कंद के रस मे घोटने से वो बध्ध हो जाता हैं और ताम्र और चाँदि का वेद्य करता है ।
तेलीया कंद के द्वारा पारद भस्म निर्माणः- कंद को अच्छी तरह से घोट के ऊसकि लुब्दी बनाओ और ऊसी के रसमे द्योटा हुआ पारा ऊस लुब्दी के बीच मे रख शराब संपुट कर पुट देने से भस्म हो जाती है । तेलीया कंद का सर्प के साथ संबंधः- ऊसके पुष्प का आकार सर्प जेसा होता है । संस्कृत नाम सर्पपुष्पी और सर्पिणी है । इसको सर्प कंद भी कहते है । तेलीया कंद का कंद सर्प विष निवारक है । ऊस कंद के निचे सर्प रहता हैं । क्युकी ऊस कंद मे बकरी के मखन जेसी गंद्य वाला रसायन कि वजह सर्प ऊसके तरफ आकर्षित रहते है । तेलीया कंद के कांड मे सर्प के शरीर जैसा निशान होता है । जैसे कोब्रा सर्प का शरीर तेल जैसा चमकता है वैसा यह पोद्या भी तेली होता है । इस प्रकार तेलीया कंद का सर्प के साथ संबंध है । किसी किसी जगह पर कंद को ऊखाडने मे सर्प अडचन भी खडी करते हैं ।
तेलीया कंद की जातीः- तेलीया कंद एकलींगी औषधि है । उसके स्त्री और पुरुष जाती के कंद अलग-अलग होते है और एक काला तेलीया कंद भी होता है । तेलीया कंद की अनेक प्रजातिया होती हैं । ऊसमे यहा दर्शाई गई प्रख्यात है ।
तेलीया कंद की दालः- जरुरी मटेरीयलः- ऊबाले हुई तेलीया कंद के पते ऊबाली हुई चने की दाल लशुन लाल मिर्च नमक तेल, दाल की रीत, तेल को एक फ्राय पान मे डाल के सब मसाले डालकर पानी जबतक ऊबलने लगे तब तक ऊबाली इस दाल को भात के साथ खाने से पुरे साल भर कोई बिमारी नही लगती अगर शरीर के किसी भाग मे पिडा होती हैं तो वोभी ठिक हो जाती है ।
तेलीया कंद की चीप्स (वेफर)- तेलीया कंद कि छोटी-छोटी वेफर बनाके सुखा दो बाद मे वेफर को फ्राय करके ऊसमे थोडा निमक मिर्च डालके खाने से अच्छा स्वाद लगता है,

kirat said...

PAGE (4)

गर्भनिरोधक के रूप में तेलीया कंद का उपयोगः- तेलीया कंद के एक चमच चुर्ण को पानी के साथ एक बार लेने से एक सप्ताह तक गर्भ स्थापन नहि होता । तेलीया कंद लुप्त होने के कारनः- भारत वर्ष मेसे तेलीया कंद लुप्त होने का एक यहि कारन रहा है कि यहा के लोगो की मानसिकता अगर किसी ने यह पौधा देख लिया तो वो ऊखाड देते है । दुसरा तेलीया कंद
एकलींगी औषधि है और ऊसके स्त्री और पुरुष जाती के कंद अलग अलग होते है इस लिए उसको फलीभुत होने के लिए दोनो पोंधो का आजु बाजु होना जरुरी हो जाता है । तिशरा कारन हैं इस कंद को लाल चिटीया नष्ट कर देती है और इस कंद को छाव वाली और गीली जगह ज्यादा अनुकुल आती है वो ना मिलने पर पौधा नष्ट हो जाता है ।
तेलीया कंद का परिक्षणः- एक लोहे कि किल लेकर उस कंद के भीतर गाडदो दुसरे दिन वो किल पर अगर जंग लग जाता है तो वो सही तेलीया कंद दुसरा परिक्षण यह है कि अगर कपुर को इस कंद के ऊपर रखने पर वो गल जाता है । तेलीया कंद के नाम का विश्लेषणः- लोह द्रावक के दो अर्थ निकलते है इसके कंद का रस धातु को गला देता है । दुसरा अर्थ है अष्ट लोह मेसे किसी भी धातु को गलाते समय ऊसमें इस कंद कि मात्रा डालने पर ऊसको वो द्रवित कर देता है वो है लोहद्रावक । दुसरा करविरकंद, तेलीया कंद की एक जाती के पत्र कनेर जेसे होते हैं इसलिए इसको करविरकंद कहते है, पत्र और कांड पर रहे तिल जैसे निशान कि वजह से इसको तिलचित्रपत्रक भी कहते है । तेल जेसा द्रव स्त्रवित करता हैं इसलीए तैलकन्द इसका कंद जहरी होने से ऊसको विषकंद भी कहते है और देहसिद्धि और लोहसिद्धि प्रदाता होने की वजह से सिद्धिकंद और विशाल कंद होने की वजह से इसको कंदसंज्ञ भी कहते है ।
वाचस्पत्य
तैलकन्द-
तिलस्यायम् अण् तैलः तिलसम्बन्धो कन्द द्रव कन्दोऽडस्य । तिलचित्तपत्रके वृक्षभेदे ‘‘तैलकन्दः कटूष्णश्च लौहद्रावकरोमतः । मारुतापस्मार विषशोफनाशकरश्र्च सः ।
रसस्य बन्धकारी च देहशुद्धिकरस्तथा’’ राजनिघण्टुः । (वाचस्पत्यम् चतुर्थभाग, पृ.३३५१)
शब्दकल्पद्रुमः
तैलप्रधानः कन्दः । कन्दविशेषः । तत्पर्यायः । द्रावककन्दः । तिलाङ्कितदलः । करवीरकन्द संज्ञ। तिलचित्रपत्रकः । अस्य गुणाः । लोहद्रावित्वम् । कटुत्मम् । उष्णत्वम् । वातापस्मारविषशोफनाशि्त्वम् । रसस्य बन्धकारित्वम् । स्नेहसिद्धिकारित्वञ्च ।
इति राजनिघण्टुः।

kirat said...

PAGE (5)

अर्शारिः पत्र संकाशं तिलबिन्दु समन्वितः सस्निग्धारस्यः भूमिस्थ तिलकन्दोतिविस्तृत, (राजनिघण्टुः)
तिलकन्देति व्याख्याता तिलवत् पत्रिणी, लता क्षीखती सुतनिबंधनात्यातये खरे (रसेन्द्र चुड़ामणी) लोहद्रावी तैलकन्द कटुष्णो वातापस्मार हारी विषादिः, शोफध्न स्याबन्धकारी रसस्य दागेवासो देहसिद्धिः विद्यते । अथ तैलकन्द उक्तो द्रावक कंदस्तिलांकितदलक्ष करवीर कंद संज्ञों ज्ञेय तिलचित्रपत्रको बाणै। (निघण्टु भूषण) ।

मर्म कला बोधिनी
पुस्तिका- मर्मकला बोधिनी लेखक- हयात बी. शास्त्री प्रकाशक- भारत ज्योतिष विद्यालय, कर्णाटक
प्रमुख वनस्पति प्रयोग- तेलिया गन्ध यह एक पौधा है, यह तीन फिट तक (१ यार्ड, १ गज) ऊँचा होता है । इसकी जड़ गाजर जैसे गोल एवं लम्बी होती है । यदि परिपुष्ट (सुविकशित) पौधे को उखाड़ कर तोला जाय तो उसका वजन लगभग ५ सेर होगा (१ पक्व सेर-८० तोला) यह पौधा जहाँ उगता है उसके आसपास धास आदि कुछ भी नही पैदा होता है । इस पौधे के नीचे वाली भूमि कृष्ण वर्ण, अत्यन्त चिकनी और मजबूत होती है । उस पौधे की नीचली भूमि पर देखने से तेल गिराया गया हो ऐसा दृष्टिगोचर होता है । उसके पत्ते आम के पत्ते जैसे किन्तु थोड़े छोटे होते है । यह पौधा नदी के किनारे, तालाब के किनारे होता है । इसकी सूखी हुई लकड़ी से पारद का मर्दन करने से उसका बन्धन हो जाता है । इस पौधे को लोहे के सरिये से खोदने से सरिया टूट जाता है । इसलिए इसको हिरण के सींग से खोदना चाहिए । इसके फल पीले रंग के होते है ।

Anonymous said...

Dr. chandan baman said...

patanjali works on ayurveda is very good,now ayurveda is in strog hand,i have large quentity of this kanda but i not know this is teliya kand
21 December 2011 21:26


श्रीमान् डा0 चन्दन जी,
मुझे पिछले काफी समय से इस कन्द की तलाश है। आज मेरे सहयोगी इन्टरनेटर पर खोज रहे थे तो आपका पता मिला। क्या आप इस दिव्य औषधी को प्राप्त करने में मेरी मदद करेंगे। यदि आप सहमत है तो कृपया मुझे अपना पता दें। मैं आपका सदैव आभारी रहूंगा। मेरा ई.मेल का पता है–
ramatrey@gmail.com

NEELESH JAIN said...

I have this. Kand I search it from kanha national park last weak.
9713720335

NEELESH JAIN said...

I have this. Kand I search it from kanha national park last weak.
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kirat said...

Dear i want some information about medicinal plant of telia kand,
As have realeted of traditional & modern litrature. i will be very obliged to
you.i have calected two plants of
telia kand
Require detail
(1) real picture of telia kand
(2) i have need green fresh plant or seeds of this plant
(3) latin name of telia kand
(4) is it real snake stay beneath of this plant ?
(5) location of this plant
(6) what it whole plant have with oily ?
(7) modern Research books or artical about this plant
(8) or any other information as you have know

i hope you will give reply early your faithfully
zala,

gujarat ayurved univesity jamnaga

mo 9924344121

email- zalakiratsinh@hotmail.com

kirat said...

Dear i want some information about medicinal plant of telia kand,
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you.i have calected two plants of
telia kand
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(1) real picture of telia kand
(2) i have need green fresh plant or seeds of this plant
(3) latin name of telia kand
(4) is it real snake stay beneath of this plant ?
(5) location of this plant
(6) what it whole plant have with oily ?
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(8) or any other information as you have know

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zala,

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mo 9924344121

email- zalakiratsinh@hotmail.com

vinayakvermaa said...

I want to buy teliakand pls rep mob 9407543632

kirat said...

if want any body this herb can contact
zala kirat sinh 09924344121

kirat said...

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kirat said...

THE SECRET OF TELIYA KAND
Page (1)
The creator of this universe has introduced intelligently medicinal herbs in the universe just like chemicals in the laboratory. Teliya kand is one of this creation .Which is almost distinct. I got the detail knowledge regarding Teliya kand from the book written by Dr. Narayan Dat Shreemaliji. Then I started research on this herb. Many untruthful stories are being heard regarding Teliya kand. Some people think that, Teliya kand is found in hilly region. Some say that it is totally vanished from the earth. In this way, what is Teliya kand, where is it found, For these questions people are directionless. I have heard many stories of Teliya kand throughout my 15 years of research period. According to one great fellow; Teliya kand can melt iron. If iron rod is inserted in Teliya kand & then if it is tried to band after removing out of kand, it will bend easily, it is also called as Jogiya kand.

People say that it is very useful in cancer.
According to one great fellow, sadhus in Himalaya region fill Teliya kand in their Cigarettes(Chilam) in order to protect their body from cold. Moreover, one great person made gold from Mercury & Copper by using Teliya kand. We have read several exampleslike this.Roots of some plants are being identified as Teliya kand in many states, So it is very difficult to decide the real Teliya kand. Hence an attempt has been made to research in this conterct. There are vernacular names of Teliya kand in many langauges, but unable to publish due to refusal from my teacher (Guru).

SOURCE DISTRIBUTION :

In old classics, it is nowhere mentioned about the source distribution of Teliya kand, but its synonyms and qualities are mentioned.
For E.G. It is quoted in Raj- Nighantu
अर्शारि पत्र संकाशं तिल बिन्दु समन्वितः सस्निग्धारस्थ भूमिस्थ तिल कन्दोति विस्तृत
It is also mentioned in Rasendra-Chudamani.
तिलकन्देति व्याख्याता तिलवत् पत्रीणी, लता क्षीरवती सुत निबंधनात्यातये खरे) ।
लोहद्रावीतैलकन्दं कटुष्णो वातापस्मार हारी विषारिः शोफध्नः स्याबन्धकारी रसस्य दागेवासो देहसिद्धि विद्यते ।

kirat said...

Page (3)
diseases &pimples etc. Its seeds mixed with salt are used in oesophagitis. its flowers are yellowish-white & aromatic.
PRECAUTIONS :
Teliya kanda is a poisonus medicinal plant. Hence precautions should be taken during its use Teliya kanda contains three types of poisonous chemical constituents; Overdose causes pharyngitis, vertigo, renal failure or it may cause death also, hence old rhizome(kanda) should be kept in water overnight or should be boiled in water by which its poisons are removed.

CULTIVATION OF TELIYA KANDA :
Teliya kand cultivation is done by sowing its seeds & rhizome. Seeds should be first scrapped by emari paper then should be soaked in water overnight. After that it should be sowed in a pot or pit. Humid & moist place is favorable for this. It should be prevented from direct sunlight. Green house is more favorable for this plant. Black, alkaline soil mixed with sand & lime should be used for the plantation of its rhizome & seeds.

REJUVENATION BY TELIYA KAND :
Rejuvenation is achieved by consuming Teliya kand powder with cow’s milk for fifteen days. Powder should be mixed in milk.

GOLD PREPRATION FROM TELIYA KAND :
If juice of Teliya kand is triturated with Arpimant for Twenty-one days then arpimant doesn’t generate fumes when subjected to fire. It is said that arpimant melts Copper & Silver & turns into Gold.


PREPRATION OF PARAD BHASMA (MERCURY) FROM TELIYA KAND :
Teliya kand is made into pulp by trituration in which triturated mercury(in Teliya kand juice) is kept & subjected to Sharav-samupata [a closed container made up of two shatlow, soil made pans.], by which Bhasma is obtained.

kirat said...

Page(4)
RELATION BETEWEEN TELIYA KAND & SNAKES :
Its flower look like snake-shaped. Sanskrit Name-Sarpapushpi Sarpini. It is also called as Sarpa kand. Teliya kand is anti snake venom. Snakes live beneath the rhizome, because that rhizome snakes like Goat’s butter towards which snaked get attracted. There are marks like snake’s body over the stern of Teliya kand. This plants is oily just like cobra’s body. Hence it is related with snakes. In some places, problems are arised by snakes while with collecting Teliya kand-rhizomes.

(SPECIES)
TYPES OF TELIYA KAND :
Teliya kand is a unisexual plant. This plant is having different female & male types. One black coloured Teliya kand is also available. There are many species of Teliya kand out which the ones mentioned here are famous.

DAL OF TELIYA KAND :
Important ingredients
Boiled leaves of Teliya kand, Boiled Bengal gram.
Garlic, Red chilly, salt, oil.

PROCEDURE :
Putting all the ingredient in an oil in a frying pan; boil until the water starts boiling. If this Dal is consumed with rice, a person can be prevented from any disease for an year & any kind of pain in any part of the body is also resolved.

(WAFER)
CHIPS OF TELIYA KAND :
Small wafers of Teliya kand are dried & then fried by adding some salt & chilly. If tastes really good.
USE OF TELIYA KAND AS A CONTRACEPTIVE :
Conception can be avoided for a week after consuming one teaspoonful of Teliya kand powder with water.

kirat said...

Page (5)
REASON BEHIND EXTINCTION OF TELIYA KAND :
Mentality of the people in India is the main reason behind the extiction of Teliya kand, if people come to see this plant, they immediately take it. Moreover this plant is unisexual, its female & male plants rhizome are separate hence they should be in the vicinity of each other for its propagation. Red ants destroy this rhizome & place with shade & moist is favourable for this plant devoid of which it gets destroyed.

EXAMINATION OF TRUE TELIYA KAND :
1. Iron nail is put inside the rhizome which catches rust on the next day.
2. Camphors melts if kept over the rhizomes.

DESCRIPTION FOR THE DIFFERENT NAMES OF TELIYA KAND :
1. LOHA - DRAVAK :
(Loha means metal) Metal melts in juice of Teliya kand or when any metal is subjected for melting, if some amount of powder of Teliya kand is put in it, then it helps in melting in the metal.
2. KARAVEER - KAND :
One species of Teliya kand is having leaves like that of Karaveer(Nerium indicam).
3. TIL - CHITRA PATRAK :
Til means sesame like marks over the leaves & stem of Teliya kand.
4. TAILKAND :
Its exudate is oily.
5. VISHKAND :
Its rhizome is poisonous.
6. SIDDHIKAND :
Achieves(helps in achieving) Dehasiddhi & Lohasiddhi.
7. KANDASANGYA :
Due to its huge rhizome(kand).

kirat said...

yaha babaji ne jo photo teliakand ka de rakha he vo telia kand nahi par noorki, or shavle,marathi me kahte he or gujarati me esko shavla or sanskrit me VAJRA MUSTHI kahte he iske pato ki bhaji hoti he or kand ka sabzi zala kirat

dr.chandan baman said...

in my areya tribal people told this kanda is very toxic ,oesophegus will be swolan

Atul Chumakia said...

i not Know this telua kand but its same us give picture
contec : 09825027828
abchumakia@gmail.com

Atul Chumakia said...

hello

any see this telia kand picture please mail me
lasermake7@gmail.com

pradeep said...

9752647303 cal me pradeep vishwakarma teliya land mail chhidwara keep jangal me hai patalkot or tamiya mileha

pradeep said...

Teliya kand tamiya or patalkot me hai chhindwara keep jangalo me call me

Puneet Wadhwa said...

we have this teliakand if anyone want can contact me
price 1crore cash only

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